मोदी सरकार की सफलता और असफलता

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2014 के लोकसभा चुनावों में प्रचंड बहुमत के साथ केंद्र में सरकार बनाने वाले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का 3 साल बाद भी जलवा बरकरार है। इन तीन सालों में पीएम मोदी ने जहां कूटनीति के जरिए विपक्ष को हमलावर नहीं होने दिया, वहीं वैश्विक स्तर पर भारत की छवि को जोरदार तरीके से रखा। हालांकि, इन तीन सालों में विपक्ष को कई मौकों पर प्रधानमंत्री को घेरने का मौका मिला लेकिन एकजुटता न होने के कारण विपक्ष विफल रहा। आइए अब आपको बताते हैं कि प्रधानसेवक ने तीन साल में क्या क्या उपलब्धियां हासिल किए हैं..और करने से चूक गए।

स्वच्छ भारत मिशन

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शहरों और गांवों को स्वच्छ रखने के उद्देश्य से 2 अक्टूबर 2014 को स्वच्छ भारत अभियान शुरू किया। पीएम मोदी ने खुद इस मिशन की शुरुआत की। पीएम मोदी की अपील पर सरकारी, गैर सरकारी और निजी क्षेत्र में इस मिशन में सहयोग किया। इस मिशन के तहत केंद्र सरकार और राज्य सरकार की ओर से शहरों और गांवों में शौचालयों का निर्माण कराया गया। इस मिशन के तहत बड़े पैमाने पर जागरूकता अभियान भी चलाए गए।

नोटबंदी का फैसला अहम

भ्रष्टाचार और कालेधन पर अंकुश लगाने के उद्देश्य से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 8 नवंबर को 1000 और 500 के नोटों को बंद करने का ऐलान किया। पीएम के इस कदम की देशभर में सराहना की गई और हर वर्ग के लोगों ने इसमें सहयोग किया। पीएम के इस कदम का असर यह रहा कि देशभर में कई स्थानों पर अरबों रुपए के कालेधन का खुलासा हुआ। नोटबंदी के बाद अर्थव्यस्था को भी 5 लाख करोड़ रुपए का फायदा हुआ।

सर्जिकल स्ट्राइक सरकार की बड़ी उपलब्धि

जम्मू कश्मीर के उरी में आतंकी हमले के बाद भारतीय सेना ने 29 सितंबर 2016 को पाक अधिकृत कश्मीर (पीओके) में सर्जिकल स्ट्राइक कर आतंकी कैंपों को तबाह कर दिया था। भारतीय सेना की इस कार्रवाई में 38 आतंकी भी मारे गए थे। इस कार्रवाई से पीएम मोदी ने पाकिस्तान को स्पष्ट संदेश दिया था कि अगर वह अपनी हरकतों से बाज नहीं आता है तो उसे माकूल जवाब दिया जाएगा। भारतीय सेना की इस कार्रवाई का पूरे देश ने स्वागत किया था।

भ्रष्टाचार मुक्त शासन

पीएम मोदी ने बीते 3 सालों में भ्रष्टाचार पर कड़ा प्रहार किया है। भ्रष्टाचार से मुक्ति पाने के लिए केंद्र सरकार ने अधिकतर योजनाओं को ऑनलाइन कर दिया है। पारदर्शिता बनाए रखने के लिए उनका पूरा ब्योरा वेबसाइट पर डाला जा रहा है। सभी टेंडर ऑनलाइन जारी किए जा रहे हैं। केंद्र सरकार के विभागों में कार्य को पूरा करने के लिए समयावली लागू की गई है। सब्सिडी सीधे खातों में दी जा रही है। कालेधन को स्विस बैंक से लाने के लिए कमेटी गठित की है। तीन सालों में सरकार पर भ्रष्टाचार को कोई आरोप नहीं लगा है।

विदेश नीति

पीएम मोदी ने अपने 3 साल के कार्यकाल में विदेश नीति पर विशेष फोकस किया है। यही कारण है कि आज दुनिया के कई देश भारत के साथ संबंधों को मजबूत करना चाहते हैं। पीएम मोदी की मजबूत विदेश नीति का ही नतीजा है कि आज भारत और अमरीका के संबंध बेहद मजबूत हैं। पीएम मोदी ने 2016 में ईरान के साथ चाबहार समझौता पर खाड़ी देशों में अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई है। पीएम मोदी की बेहतर विदेश नीति के चलते ही आज भारत ने विदेशी निवेश के मामले में अमरीका और चीन जैसे देशों को भी पछाड़ दिया है।

ये रहीं कमियां-

सीमा विवाद

पड़ोसी देशों के साथ दशकों से चल रहे सीमा विवाद मोदी सरकार के लिए सबसे बड़ी चुनौती रहा है। बीते 3 सालों में मोदी सरकार की ओर से पाकिस्तान और चीन से सीमा विवाद सुलझाने के लिए कई बार प्रयास किए गए, लेकिन इनमें कामयाबी नहीं मिल पाई। बीत 3 सालों में पाकिस्तान और चीन ने कई बार भारतीय सरजमीं पर अपना हक जताने का प्रयास किया, लेकिन मोदी सरकार इसको लेकर ठोस कदम नहीं उठा पाई।

बेरोजगारी

चुनाव प्रचार के दौरान 1 करोड़ नौकरी पैदा करने का वादा करने वाले पीएम मोदी इस क्षेत्र में भी कोई खास कमाल नहीं दिखा पाए हैं। बीते तीन सालों में देश में बेरोजगारी की दर में वृद्धि हुई है। सिर्फ नौकरियां ही नहीं, बीते 3 सालों में लोगों को रोजगार सृजित करने के उद्देश्य से प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम के तहत दिए जाने वाले लोन के लाभान्वितों की संख्या में कमी आई है। इसके अलावा मोदी के 3 साल के कार्यकाल में स्थायी नौकरियों की संख्या में भी कमी आई है।

भूमि अधिग्रहण

यूपीए शासनकाल से लंबित चले आ रहे भूमि अधिग्रहण के मुद्दे पर भी मोदी सरकार बीते 3 सालों में कोई ठोस कदम नहीं उठाई पाई है। किसान अपनी जमीन के उचित मुआवजे की मांग को लेकर सरकार पर हमलावर हैं। वहीं, ऊंची विकास दर बनाए रखने के लिए सरकार पर उद्योगों को सस्ती और सुलभ जमीन उपलब्ध कराने का दबाव है। लेकिन मोदी सरकार इस मुद्दे पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं कर पाई है। इस मुद्दे को लेकर पार्टी और सरकार के भीतर भी सहमति नहीं है।

आदर्श सांसद ग्राम योजना

गांवों के विकास के लिए 11 अक्टूबर 2014 को शुरू की गई आदर्श सांसद ग्राम योजना भी परवान नहीं चढ़ पाई है। इस योजना के तहत पीएम मोदी ने देश के सभी सांसदों से एक-एक गांव को गोद लेकर विकास करने का आह्वान किया था। पीएम के आह्वान पर सांसदों ने गांव तो गोद ले लिए, लेकिन बड़ी संख्या में इन गांवों में ग्रामीणों की मूलभूत जरूरत के अनुसार भी विकास कार्य नहीं कराए गए। इसका मुख्य कारण सांसदों की दिलचस्पी नहीं होना है।

आंतरिक सुरक्षा

बीते 3 सालों में मोदी सरकार ने माओवाद को खत्म करने के लिए कई प्रयास किए हैं। इन प्रयासों की बदौलत माओवादियों की हिंसक गतिविधियों पर थोड़ी लगाम तो लगी है, लेकिन इस दौरान सुरक्षा बलों के साथ हुई घटनाओं ने मोदी की चिंता बढ़ा दी है। अभी माओवाद प्रभावित राज्यों में स्थानीय पुलिस के अलावा केंद्रीय सुरक्षा बलों के 1 लाख 20 हजार जवान तैनात हैं। लेकिन, माओवादी घटनाओं पर अंकुश नहीं लग पा रहा है।

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