क्या लिखने की सजा़ हत्या है????

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क्या लिखने की सज़ा किसी की हत्या है????

आजाद भारत में आजा़दी शब्द का अर्थ सिर्फ पन्नो में सिमट के रह गई है…शब्दो की सच्चाई पर मौत का प्रतिबंध लगाया जा रहा है। पत्रकारों की लगातार बढ़ रही हत्या इस बात का प्रमाण है कि सच्चाई से भरे शब्दो पर सरकार और उनके भक्तो का प्रतिबंध है।
क्या लिखने की सज़ा किसी की हत्या हो सकती है???

बीते मंगलवार को बैंगलुरु में गौरी लंकेश की कुछ अज्ञात लोगो ने गोली मार कर हत्या कर दी । गौरी लंकेश पेशे से पत्रकार थी लंकेश पत्रिके नाम के समाचार पत्र की संपादक थी ।

उनकी हत्या समाज में सुरक्षा के नाम पर काला धब्बा है जिसे सरकार और उनके भक्त social media पर धोने की कोशिश कर रहे हैं।

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