164 साल पुराने अयोध्या विवाद पर SC कल से करेगा सुनवाई, 9000 पन्नों का ट्रांसलेशन देखेगा

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सात भाषाओं में 9 हजार पन्नों के दस्तावेज, 90 हजार पेजों में गवाहियां दर्ज; हाईकोर्ट के फैसले के 7 साल बाद सुनवाई।
नई दिल्ली/लखनऊ.अयोध्या फिर चर्चा में है। इसकी तीन वजह हैं। पहली- करीब 164 साल पुराने विवाद पर मंगलवार से सुप्रीम कोर्ट सुनवाई शुरू करेगा। दूसरी- अगले दिन 6 दिसंबर को विवादित ढांचा ढहाए जाने के 25 साल पूरे हो रहे हैं। और तीसरी- उत्तर प्रदेश में 15 साल बाद उस बीजेपी की सरकार है, जिसने अयोध्या आंदोलन को तेज किया था। अयोध्या पर इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले के 7 साल बाद यह सुनवाई होगी। इस दौरान सुप्रीम कोर्ट केस से जुड़े अलग-अलग भाषाओं के ट्रांसलेशन किए गए 9000 पन्नों को देखेगा।

7 साल से लंबित हैं 20 पिटीशंस

– मामले में 7 साल से पेंडिंग 20 पिटीशंस इस साल 11 अगस्त को पहली बार लिस्ट हुई थीं। पहले ही दिन डॉक्यूमेंट्स के ट्रांसलेशन पर मामला फंस गया था। संस्कृत, पाली, फारसी, उर्दू और अरबी समेत 7 भाषाओं में 9 हजार पन्नों का अंग्रेजी में ट्रांसलेशन करने के लिए कोर्ट ने 12 हफ्ते का वक्त दिया था। इसके अलावा 90 हजार पेज में गवाहियां दर्ज हैं। यूपी सरकार ने ही 15 हजार पन्नों के दस्तावेज जमा कराए हैं।

दोपहर 2 बजे शुरू होगी सुनवाई

– मंगलवार दोपहर 2 बजे कोर्ट नं. 1 में 3 जजों की स्पेशल बेंच सुनवाई शुरू करेगी। चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा के कॅरियर का यह सबसे बड़ा केस है। अगले साल 2 अक्टूबर को वह रिटायर होंगे। सुन्नी वक्फ बोर्ड के वकील कपिल सिब्बल और राजीव धवन होंगे। रामलला का पक्ष हरीश साल्वे रखेंगे।
– कोर्ट देखेगा कि डॉक्यूमेंट्स का ट्रांसलेशन पूरा हुआ है या नहीं। ट्रांसलेशन नहीं होने पर पेंच फंस सकता है, लेकिन अदालत कह चुकी है कि अब सुनवाई नहीं टलेगी। 5 दिसंबर से दलीलें सुनी जाएंगी। सबसे पहले ओरिजनल टाइटल सूट दाखिल करने वाले दलीलें रखेंगे। फिर बाकी अर्जियों पर बात होगी।

7 साल पहले इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 3 हिस्सों में बांटी जमीन
– 30 सितंबर 2010 को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने इस मामले में फैसला सुनाया था। कोर्ट ने विवादित 2.77 एकड़ जमीन 3 बराबर हिस्सों में बांट दी थी। अदालत ने रामलला की मूर्ति वाली जगह रामलला विराजमान को दी। सीता रसोई और राम चबूतरा निर्माेही अखाड़े को और बाकी हिस्सा मस्जिद निर्माण के लिए सुन्नी वक्फ बोर्ड को दिया गया।

7 साल मेंं सुप्रीम कोर्ट में 20 अर्जियां, 7 चीफ जस्टिस बदले

– हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ सुन्नी वक्फ बोर्ड 14 दिसंबर 2010 को सुप्रीम कोर्ट पहुंचा। फिर एक के बाद एक 20 पिटीशंस दाखिल हो गईं। सुप्रीम कोर्ट ने 9 मई 2011 को हाईकोर्ट के फैसले पर स्टे लगा दिया, लेकिन सुनवाई शुरू नहीं हुई। इस दौरान 7 चीफ जस्टिस बदले। सातवें चीफ जस्टिस जेएस खेहर ने इस साल 11 अगस्त को पहली बार पिटीशंस लिस्ट की।

दो मजहबों के 3 जजों की स्पेशल बेंच

चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा: 3 तलाक खत्म करने और सिनेमा हॉल में राष्ट्रगान के दौरान खड़े होने जैसे फैसले सुना चुके हैं।
जस्टिस अब्दुल नाजिर: तीन तलाक बेंच में थे। प्रथा में दखल गलत बताया था। प्राइवेसी को फंडामेंटल राइट करार दिया था।
जस्टिस अशोक भूषण: दिल्ली सरकार अौर एलजी के बीच जारी अधिकारों की जंग के विवाद पर सुनवाई कर रहे हैं।

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