जिला प्रतापगढ़ की कुछ खास बातें…

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नीतीश सिंह:  प्रतापगढ़ यानि प्रतापो का गढ़ राजा महाराजों का गढ़। हमारे उत्तर प्रदेश में वैसे तो कई जिले है और कई जिलों के नाम तो मुस्लिम सुलतानों से जुडे हुए हैं जैसे आजमगढ़, अलीगढ़, फैजाबाद, गाजियाबाद, फिरोजाबाद आदि। लेकिन हमारे प्रतापगढ़ का नाम नही बदला। प्रतापगढ़ की तो वैसे कई सुनी सुनाई कहानीयां है लेकिन प्रतापगढ़ के लड़को का तो अलग ही भौकाल है। तो अब हम प्रतापगढ़ की कुछ खात बातों के बारे में बात करेंगे

प्रतापगढ़ का छोटा सा इतिहास

प्रतापगढ़ भारतीय राज्य उत्तर प्रदेश का एक जिला है, इसे लोग बेल्हा भी कहते हैं, क्योंकि यहां बेल्हा देवी मंदिर है जो कि सई नदी के किनारे बना है। इस जिले को ऐतिहासिक दृष्टिकोण से काफी अहम माना जाता है। यहां के विधानसभा क्षेत्र पट्टी से ही देश के प्रथम प्रधानमंत्री पं॰ जवाहर लाल नेहरू ने पदयात्रा के माध्यम से अपना राजनैतिक करियर शुरू किया था। इस धरती को रीतिकाल के श्रेष्ठ कवि आचार्य भिखारीदास और राष्ट्रीय कवि हरिवंश राय बच्चन की जन्मस्थली के नाम से भी जाना जाता है। यह जिला धर्मसम्राट स्वामी करपात्री जी कि जन्मभूमि और महात्मा बुद्ध की तपोस्थली है।

 

स्वतंत्रता में हमारा योगदान

भारतीय स्वाधीनता संग्राम में प्रतापगढ़ का योगदान अत्यधिक महत्वपूर्ण है।१८५७ के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम में बेल्हा के वीर सपूतो ने भारत माता की रक्षा के लिए अपने प्राणो की आहूति देने से पीछे नहीं हटे।१८५७की महान क्रांति में देश के लिए अपना सबकुछ न्यौछावर करने वाले अमर शहीद बाबू गुलाब सिंह को इतिहास हमेशा याद रखेगा। तरौल के तालुकेदार बाबू गुलाब सिंह ने अंग्रेजी सेना के छक्के छुड़ा दिए थे। जब इलाहाबाद से लखनऊ अंग्रेजी सैनिक क्रांतिकारियों के दमन के लिए जा रहे थे। तब उन्होंने अपनी निजी सेना के साथ मांधाता क्षेत्र के कटरा गुलाब सिंह के पास बकुलाही नदी पर घमासान युद्ध करके कई अंग्रेजों को मार डाला था। बकुलाही का पानी अंग्रेजों के खून से लाल हो गया था। मजबूर होकर अंग्रेजी सेना को वापस लौटना पड़ा था। हालांकि इस लड़ाई में किले पर फिरंगी सैनिकों ने उनके कई सिपाही व उनकी महारानी को गोलियों से भून डाला था। मुठभेड़ में बाबू गुलाब सिंह गंभीर रूप से घायल हुए थे। उचित इलाज के अभाव में तीसरे दिन वह अमर गति को प्राप्त हो गए। ऐसे महान क्रांतिकारी की न तो कहीं समाधि बन पाई और न ही उनकी यादगार में स्मारक ही।

सन् १८५७ के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम में प्रतापगढ़ के कालाकाँकर रियासत के राजा हनुमंत सिंह के पुत्र श्री लाल प्रताप सिंह चांदा के पास अंग्रेजों से लड़ते हुए वीरगति को प्राप्त हुए और उनके चाचा अंग्रेजी सेना से लड़ते हुए शहीद हुए।

यंहा के राजा राम पाल सिंह भारतीय कांग्रेस के संस्थापकों में से एक थे।महात्मा गाँधी का ऐतिहासिक भाषण कालाकाँकर में हुआ। महात्मा गाँधी की उपस्थिति में राजा अवधेश सिंह ने विदेशी वस्त्रों की होली जलायी। जनवरी १९२० को सुभाष चन्द्र बोस प्रतापगढ़ आये और सभी से अंग्रेजी सेना में न भर्ती होने की अपील की यंहा सुभाष जी का स्वागत ५०००० लोगों ने किया। पश्चिम अवध प्रान्त के प्रतापगढ़ का यह क्षेत्र स्वतंत्र भारतकी भावना लिए हमेशा ही जनांदोलन करते हुए कालाकाँकर वीरों की वीरगति से सजा हुआ स्वाधीनता संग्राम में सबसे आगे रहा।

पंडित वचनेश त्रिपाठी द्वारा रचित पाथेय कण (हिंदी पत्रिका) में प्रतापगढ़ में १८५७ कि क्रांति कि एक और घटना इस प्रकार है, अवध के प्रतापगढ़ जिले में एक दुर्ग जो सई नदी के किनारे है, खासकर जहाँ सई नदी दिशा बदलकर मु ड़ती है। यह दुर्ग चतुर्दिक सघन अरण्य से आवेष्ठित है। यहाँ चार हजार क्रांतिकारी सैनिक एकत्र थे तथा इनके पास वही गणवेश (वर्दी) था जो इन्हें ब्रिटिश सेना में पहनना पड़ता था। इसी सरकारी गणवेश में वे ब्रितानी फौज से लड़े थे। यह लडाई जैसा कि च् अवध गजेटियर छ में हवाला दिया गया, बड़ी विकट हुई। इस किले में तोपें बनाने तथा उनके लिए लोहा गलाने और गोले ढ़ालने के लिए बाकायदा भट्ठियाँ बनी हुई थीं, यहाँ से सब क्रन्तिकारी सिपाही हटे तो उनके पास जो तोपें थी उन्हें बेकार करके ही गये ताकि शत्रु सेना उनका उपयोग न कर पाये।

 

कुछ पौराणिक स्थल

1. बेल्हा देवी मंदिर

2.    माँ पंचमुखी मंदिर

3.    भयहरणनाथ धाम

4.    घुइसरनाथ (घुश्मेश्वरनाथ) धाम)

5.    भक्ति धाम

6.    शनिदेव मंदिर

7.    चंदिकन देवी शक्तिपीठ

8.    शक्तिपीठ मां चौहर्जन धाम

9.    हौदेश्वर नाथ धाम

10.  बाबा बेलखरनाथ धाम

 

प्रतापगढ़ में आपको हर वर्ग के लोग मिल जायेंगे। अमीर, गरीब, अनपढ़, पढ़े-लिखे, किसान इत्यादि। जातिय विविधता भी यहाँ पर आपको बहुतायत में देखने को मिल जायेगी। जैसेः- हिन्दु, मुस्लिम, सिक्ख व ईसाई। हिन्दुओं का वर्चस्व प्रतापगढ़ में शुरु से ही रहा है। स्लिम तबका भी बेगमवाट नामक जगह पर बहुलता में देखा जा सकता है। जहाँ करीगरों की भरमार है। लोहे की आलमारियों से लेकर बिस्कुट फैक्टरियाँ तक इस जगह पर, आपको गली के किसी न किसी छोर पर मिल जायेंगी। दूसरी तरफ पंजाबी मार्केट, पंजाबियों का गढ़ माना जाता है। कपड़ों के व्यवसाय पर इनका दबदबा आज भी है। कपड़ों की खरीद-फरोख्त के लिये पंजाबी मार्केट सबसे उपयुक्त जगह मानी जाती है। कुछ साल पहले महिलाओं को सड़कों पर उतना नहीं देखा जा सकता था लेकिन आज माहौल काफी बदल चुका है। आधुनिकता की हवा यहाँ भी तेजी से चल निकली है। लड़कियाँ और महिलायें सड़कों पर घूम-घूम कर खरिदारी करती हुई आपको नजर आ जायेंगी। परिधानों में मुख्यता साड़ी, सलवार-सूट की बहुलता देखी जा सकती है। इसके अतिरिक्त लड़कियाँ भिन्न-भिन्न लिबासों में आपको नजर आ सकती है। जिनमें जिन्स-टीशर्ट, लाँग स्कर्ट प्रमुख हैं। कुछ मुस्लिम महिलायें आज भी बुर्के में दिख जाती है। जल्द ही दिल्ली व मुम्बई की तरह यहाँ भी परिधानों में आधुनिक व्यापकता दिखाई पड़ेगी। ढकवा की बर्फी बहुत मसहूर है

राजनीति

प्रतापगढ़ के विधानसभा क्षेत्रों के नाम हैं रानीगंज, कुंडा, विश्वनाथगंज, पट्टी, वीरापुर, गढ़वारा, सदर, बाबागंज, विहार, प्रतापगढ़ और रामपुर खास है। प्रतापगढ़ की राजनीति में यहाँ के तीन मुख्य राजघरानों का नाम हमेशा रहा। इनमे से पहला नाम है विश्वसेन राजपूत राय बजरंग बहादुर सिंह का परिवार है जिनके वंशज रघुराज प्रताप सिंह (राजा भैया) हैं, राय बजरंग बहादुर सिंह हिमांचल प्रदेश के गवर्नर थे तथा स्वतंत्रता संग्राम सेनानी भी थे। दूसरा परिवार सोमवंशी राजपूत राजा प्रताप बहादुर सिंह का है और तीसरा परिवार राजा दिनेश सिंह का है जो पूर्व में भारत के वाणिज्य मंत्री और विदेश मंत्री जैसे पदों पर सुशोभित रहे। इनकी रियासत कालाकांकर क्षेत्र है। दिनेश सिंह की पुत्री राजकुमारी रत्ना सिंह भी राजनीति में हैं तथा प्रतापगढ़ की सांसद थीं। प्रतापगढ़ राजनिति में वर्तमान समय में प्रतापगढ़ संसदीय क्षेत्र से सांसद कुँवर हरिवंश सिंह हैं और कुंडा विधानसभा क्षेत्र से कुंडा के निर्दलीय विधायक रघुराज प्रताप सिंह “राजा भैया” हैं साथ ही साथ लगातार नौ बार जीत कर विश्व कीर्तिमान बनाने वाले कांग्रेस विधायक प्रमोद तिवारी हैं। इस समय प्रतापगढ़ के सभी विधानसभा क्षेत्रों में से रामपुर खास और कुंडा को छोड़ सभी पर समाजवादी पार्टी का वर्चस्व है जो कुंडा विधायक राजा भैया के सपा समर्थन से उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव -२०१२ में मिला है।

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